Sunday, May 3, 2009

हिन्दी समाचार पत्रों को पढ़ते समय बड़ा कष्ट होता है जब सूचना के स्थान पर इत्तिला ,समाचार के स्थान पर ख़बर ,सावधानी के स्थान पर ऐहितियत,आतंकवादी के स्थान पर दहसत्गर्द आदि पढने को मिलते हैं .अति तब होती है जब दैनिक जागरण जैसे पत्र जोकि अपने को सबसे बड़ा हिन्दी का पत्र बताते है .मुझे लगता है इसका सबसे बड़ा कारण सवान्दाताओका तथाकथित अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयओं में पढ़ना है जहाँ हिन्दी के नाम पर उर्दू पढाई है.

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